इस देश की अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, बच्चे के लिए पति कर सकेगा दिवंगत पत्नी के भ्रूण का इस्तेमाल
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पत्नी की मौत के बाद मांगी थी अनुमति
पत्नी की मौत के बाद टेड जेनिंग्स एक सरोगेसी के लिए 2018 में पत्नी के साथ मिलकर बनाए गए एक बचे हुए भ्रूण का उपयोग करना चाहते थे. यह भ्रूण लंदन में एक निजी प्रजनन क्लिनिक में सुरक्षित रखा गया है. उनकी अपील के बाद निवेश प्रबंधक ने उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश से कहा कि वह उसे कानूनी रूप से भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दें. अदालत से इसकी अनुमति इसलिए मांगी गई थी क्योंकि उसकी दिवंगत पत्नी मरने से पहले इस संबंध में लिखित सहमति नहीं दे पाई थीं. इस अर्जी को पहले ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफईए) ने खारिज कर दिया था.
जज ने याचिका के पक्ष में सुनाया फैसला
टेड जेनिंग्स की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बुधवार को अदालत ने टेड के समर्थन में फैसला सुनाया. जज जस्टिस थीस ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि चोया ने अपनी मृत्यु की स्थिति में भ्रूण का उपयोग करने के लिए सहमति दी थी. उन्होंने कहा कि चोया को लिखित रूप में सहमति देने का पर्याप्त अवसर उस समय नहीं मिल पाया था क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान उन्होंने जो फॉर्म भरा था, उसमें यह स्पष्ट नहीं था कि एक महिला को मृत्यु के बाद परिवार को सहमति प्रदान करने के लिए क्या करना चाहिए.
आगे बाधा नहीं होगी लिखित सहमति
जज ने कहा कि, इस मामले में व्यक्तियों के अधिकारों का कोई टकराव नहीं है और जेनिंग्स को अनुमति देना वैधानिक योजना के एक मौलिक उद्देश्य को कमजोर नहीं करेगा. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जेनिंग्स का मामले के बाद अब लिखित सहमति एक बाधा नहीं होगी.




